मंगल ग्रह पर जीवन की मोजुदगी के प्रमाण तलाशने की दिशा में एक बड़ी छलांग लगाते हुए अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को एक एक बहुत ही बड़ी सफलता हाथ लगी है | नासा के पर्सीवरेंस रोवर ने गुरूवार – शुक्रवार ( 18-19 फरवरी ) कि मध्यरात्री में तक़रीबन करीब करीब 2:20 बजे मंगल की सबसे ख़तरनाक मानी जाने वाली जजीरो क्रेटर पर सफलता पूर्वक लैंडिंग कि गई |
Who Is Swati Mohan ??
कौन है स्वाति मोहन ??
वह नाम है स्वाति मोहन Swati Mohan है आपको पता चल गया है …………. तो आइये जानते है कौन है स्वाति मोहन ?? आज की इस पोस्ट में विस्तार से इस बारे में
कौन है स्वाति मोहन ??
स्वाति मोहन दरअसल भारतीय मूल की अमेरिकी वैज्ञानिक एवं अमेरिका स्थित नासा में बतोर इंजीनियर है |
Nasa Scientist Dr. Swati Mohan
नासा के मिशन मंगल में क्या रही इनकी भूमिका :-
नासा कि इस सफलता पर पूरी दुनिया प्राउड फील कर रही है और सभी को ये लग रहा है कि यह सफलता हमारी यानी सम्पूर्ण मानव जाती की है परन्तु इसके विपरीत हम भारतीयों के लिए यह एतिहासिक यादगार क्षण एक और वजह से बहुत ख़ास रहा | पर्सीवरेंस रोवर कि मार्श पर टच डाउन (लेंडिंग ) की घोषणा करने वाली भारतीय मूल की अमेरिकी साइंटिस्ट डॉ. स्वाति मोहन नासा के इस पर्सीवरेंस मार्श रोवर मिशन में इस मिशन की गाइडेंस , नेविगेशन एंड कंट्रोल ऑपरेशन को लीड कर रही थी | वास्तव में पर्सीवरेंस रोवर के इस मिशन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है |
डॉ. स्वाति मोहन कि जन्म एवं शिक्षा :-
वेसे तो इनका जन्म भारत के बेंगलोर में हुआ था किन्तु जब फिर बाद में डॉ. स्वाति मोहन के माता – पिता अमेरिका गए थे तब इनकी उम्र महज 1 वर्ष ही थी | इनका अधिकांश बचपन अमेरिका के वर्जिनिया , वाशिंगटन डीसी के मेट्रो एरिया में बिता था और यही पर उनका पालन-पोषण भी हुआ | वे 16 वर्ष की उम्र तक तो एक बाल रोग विशेषज्ञ बनने की इच्छा ही रखती थी |
किन्तु फिर बाद में डॉ. Swati Mohan ने अपनी पहली ही फिजिक्स की क्लास में फेसला कर लिया था की मुझे तो स्पेस एक्सप्लोरेशन में ही अपना करियर बनाना है | डॉ. स्वाति मोहन ने कॉर्नेल विश्वविद्यालय से मेकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बेचलर ऑफ़ साइंस ( B.S.) तथा एरोनॉटिक्स में एम. एस.और पीएचडी कि उपाधि प्राप्त कि है |
डॉ. Swati Mohan ने नासा के कैसिनी (मिशन टू सैटर्न ) प्रोजेक्ट पर भी काम किया था जो कि सैटर्न (शनि ग्रह ) को एक्स्प्लोर करने के लिए नासा ने भेजा था | इन सब मिशनो के साथ साथ इन्होने ग्रेल (GRAIL) मिशन ((चंद्रमा की उड़ान की एक जोड़ी)) पर भी काम किया था | इन्होने 2013 में पर्सीवरेंस मार्श रोवर मिशन परियोजना की शुरुआत के बाद से मंगल म मिशन 2020 पर काम किया है। वह वर्तमान में पासाडेना, सीए में नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी में मंगल 2020 परियोजना के लिए मार्गदर्शन, नेविगेशन और नियंत्रण संचालन लीड का काम देख रही है है।
किस वजह से अंतरिक्ष अन्वेषण की तरफ रुझान गया Swati Mohan का, क्या थी वो प्रमुख वजह :-
जब वे महज 9 वर्ष की थी तब Swati Mohan ने बचपन में स्टार ट्रेक का पहला एपिसोड देखा था स्टार ट्रेक के देखने के बाद, अंतरिक्ष की दुनिया के लिए उसका जुनून नौ साल की उम्र में शुरू हो चूका था यही जुनून बाद में इनको नासा तक भी ले गया | और साथ ही साथ नासा के कई अहम मिशनो में काम करने तथा उन्हें लीड करने का गोरव भी हासिल हुआ |
कुछ इस तरह रहा यान या रोवर का सफ़र :-
आपको ज्ञात होगा कि आज से करीब 7 महीने पहले यानी 20 जुलाई 2020 को नासा के स्पेस सेंटर केप कैनवरल, फ्लोरिडा से यह मार्स पर्सिवरेंस रोवर मंगल ग्रह के लिए रवाना हुआ था तब से ही अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की टीम इस पर अपनी नजर बनाये हुए है। इस यान ने अपने सम्पूर्ण सफ़र ( उड़ान भरने से लेकर लैंडिंग तक ) में 203 दिनों का वक्त लगा और इस पुरे सफ़र के दोरान करीब 47.2 करोड़ ककिलोमीटर की दुरी भी तय की है |
ये होंगे इस मिशन के प्रमुख उद्देश्य :-
पानी की खोज करेगा =>> इस मिशन का उद्देश्य मंगलग्रह पर पानी की मोजुदगी का पता लगाना भी होगा नासा द्वारा मंगल पर भेजा गया पर्सीवरेंस रोवर तथा इंजीन्यूटी हेलीकॉप्टर मंगलग्रह पर जीवन की मोजुदगी के संकेतो के साथ साथ वहा पानी की खोज और इससे सम्बंधित कई जांच भी करेगा |
मंगल से इकठ्ठे कर नमूने लाएगा मौसम तथा पर्यावरण की जांच भी करेगा =>> यह मार्श रोवर , मार्श एनवायर्नमेंटल डायनामिक्स एनालाईजर सिस्टम या डिवाइस के तहत मंगलग्रह के मौसम और जलवायु का विशलेषण कर अध्ययन करेगा यह रोवर जो चट्टानें मंगल से इकठ्ठा करेगा उन चट्टानों के नमूने को लेकर साल 2031 में धरती पर लाया जाएगा |
हमें आशा है अब तो आप जान गए होंगे Swati Mohan के बारे में कि ये कोन है और इनकी नासा के मिशनो में कब कब क्या क्या भूमिका रही है |