अपना GPS पाने के करीब पहुंचा भारत, IRNSS-1E नेविगेशन सेटलाइट लॉन्च

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भारत ने बुधवार को श्रीहरिकोटा स्थित अंतरिक्ष केंद्र से अपने पांचवें नौवहन उपग्रह आईआरएनएसएस-1ई का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। प्रक्षेपण ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) से सुबह 9.31 बजे किया गया। यह 2016 का पहला सफल उपग्रह लॉन्च है। इस प्रक्षेपण के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है, जिनके पास अपनी खुद की उपग्रह नौवहन प्रणाली है।

भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) सात उपग्रहों का एक समूह है, जिनमें से पांच-आईआरएनएसएस1ए, आईआरएनएसएस1बी, आईआरएनएसएस1सी और आईआरएनएसएस-1डी) को कक्षा में प्रक्षेपित किया जा चुका है।

सुबह करीब 9.31 बजे 44.4 मीटर ऊंचे और 320 टन वजनी पीएसएलवी रॉकेट ने लॉन्च होने के महज 19 मिनट बाद खुद को आईआरएनएसएस-1ई से अलग कर लिया और इसे कक्षा में स्थापित किया।

वैज्ञानिक इस दौरान हर सेकंड रॉकेट की गति पर टकटकी लगाए दिखे। प्रक्षेपण का गवाह बनने के लिए मीडिया टीमें भी पहुंची हुई थीं।

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी इसरो के अधिकारियों ने सुबह में बताया कि पहले चार परिक्रमा नौवहन उपग्रहों से मिले संकेतों से आईआरएनएसस की संकल्पना या अवधारणा सफल साबित हुई है।

अधिकारियों के अनुसार, सात उपग्रहों के लांच को पूरा करने के क्रम में जल्द ही दो और नौवहन उपग्रहों को लांच किया जाएगा। आईआरएनएसस प्रणाली में भूतल पर स्थापित दो उपग्रह भी शामिल हैं।

इसके लॉन्च की 48 घंटे की उल्टी गिनती सोमवार सुबह 9.31 बजे शुरू हुई थी।

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